
श्रद्धेय दत्तोपंत ठेंगड़ी जन्म शताब्दी समारोह समिति जयपुर द्वारा दिनांक 8 मार्च 2020 को श्रद्धेय श्री दत्तोपंत जी ठेंगडी जन्म शताब्दी वर्ष उदघाटन समारोह पाथेय भवन मालवीय नगर जयपुर मे आयोजित किया गया ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री गुरु चरण सिंह गिल पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता, राजस्थान सरकार एवं अध्यक्ष राष्ट्रीय सिख संगत द्वारा की की गई । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री के एस आहलूवालिया,सेवा निवृत्त न्यायाधिपति,राजस्थान उच्च न्यायालय एवं पीठासीन अधिकारी,रेल्वे दुर्घटना दावा प्राधिकरण नई दिल्ली थे। उन्होंने दतोपंत जी को याद करते हुए कहा कि वे दूरदृष्टा थे। 1989 में नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक सम्मेलन में उन्होंने घोषणा की थी कि साम्यवाद बीसवीं सदी के अंत तक दोस्त हो जाएगा तथा अमेरिका प्रायोजित पूंजीवाद 21वीं सदी के प्रारंभ में ध्वस्त होने ही वाला है जो आगे चलकर सत्य सिद्ध हुआ। उन्होंने भौतिकवाद के स्थान पर धर्म आधारित काम की अवधारणा पर जोर दिया। विद्यार्थी परिषद की स्थापना के साथ नया नारा दिया, ज्ञानशील एकता विद्यार्थी परिषद की विशेषता। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप मे स्वदेशीे जागरण मंच के अखिल भारतीय विचार विभाग प्रमुख एवं आर्थिक चिंतक एवं उत्तर क्षेत्र संगठक माननीय श्री सतीश कुमार जी ने संबोधित करते हुए कहा कि विश्व में प्रथम विश्व युद्ध के बाद रुसी समाजवाद का विकास मॉडल आया, दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिकी पूंजीवाद का मॉडल आया इन दोनों विचार को नकारते हुए दंतोपन्त जी ने थर्ड वे नामक पुस्तक से समग्र विकास का नया आर्थिक चिंतन दिया। सतीश जी ने बताया कि पश्चिमी मॉडलों ने विश्व को असमानता बेरोजगारी, पर्यावरण विनाश, शारीरिक व मानसिक व्याधियां व सामाजिक विद्वेष दिया जबकि हिन्दू अर्थ चिंतन ने सबका हित चिंतन करते हुए समग्र विकास का मॉडल दिया जिसमें जिव मात्र की चिंता ही नही पर्यावरण संतुलन पर भी जोर दिया गया। प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध उपभोग के स्थान पर सम्यक दोहन के उपयोग पर जोर दिया। विशिष्ट वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक के अखिल भारतीय बौद्धिक शिक्षण प्रमुख श्री स्वांत रंजन जी ने दंतोपन्त जी के जन्म से प्रचारक बनने व मजदूर क्षेत्र में राष्ट्रवादी विचारधारा का नया काम खड़ा करने पर प्रकाश डाला। आपने बताया कि ठेंगड़ी जी, परम पूजनीय डॉ साहब व गुरूजी के गुणों को आत्मसात करने वाले जीवंत वाहक थे। ठेंगड़ी जी विचारक, दार्शनिक, नेतृत्व के गुणों से परिपूर्ण अनुपम व्यक्तित्व थे। दंतोपन्त जी ने अपने जीवन काल में अनेक पुस्तके लिखी जो आज भी प्रेरक व कालजयी हैं।
अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री गुरु चरण सिंह गिल ने कहा की श्री ठेंगड़ी जी महान व्यक्तित्व के धनी होते हुए भी कार्यकर्ताओं के साथ व्यवहार रूप में अति सरल थे। उनका यही गुण कार्यकर्ता को संगठन के कार्य की ओर आकर्षित करता था। एक बार जिसके कंधे पर उन्होंने हाथ रख दिया हमेशा के लिए वह संगठन का हो जाता था।

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