Wednesday, 10 April 2019

भारत में श्रमिक संघों की स्थापना का इतिहास

                   

लोकतांत्रिक राजनीतिक प्रणाली में श्रमिक संघों का महत्वपूर्ण स्थान है। विश्व में आये औद्योगीकरण ने श्रमिकों के जीवन एवं कार्यदशाओं के लिए कई प्रकार की परेशानियां पैदा कर दी और श्रमिक का शोषण अत्यधिक मात्रा में बढ़ गया । इसी शोषण से मुक्ति के लिए तथा पीड़ादायक व असहनीय कार्यदशाओं में बदलाव के लिए विश्व के विभिन्न देशों में श्रमिकों ने आपस में एकत्र होकर श्रमिक संगठनों की स्थापना की शुरूआत की। भारत भी इस घटनाक्रम से अलग नहीं रहा। भारत में भी औद्योगीकरण के कारण श्रमिक संघों एवं आंदोलनों का प्रारम्भ हुआ. परन्तु संगठित रूप में भारत में श्रमिक संघों का गठन प्रथम विश्व युद्ध के बाद हुआ। प्रथम विश्वयुद्ध की समाप्ति तक श्रमिक संघों का मुख्या उद्देश्य श्रमिकों की सेवा करना तथा उनकी मूलभूत समस्याओं समाधान करना था। ये श्रमिक संघ समाज सेवियों द्वारा संचालित किये जा रहे थे तथा इनका कोई राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय स्टार पर अपना संगठन या संस्था नहीं थी। सन 1919 में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आइ0एल0ओ0) की स्थापना की गयी। 
                      अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा आयोजित सभाओं में भारत से भी श्रमिक प्रतिनिधियों को भेजने की व्यवस्था करने एवं देश के विभिन्न श्रमिक संघों को संगठित करके राष्ट्रीय मंच प्रदान करने के लिए लाला लाजपत राय की अध्यक्षता में 31 अक्टूबर, 1920 को ट्रेड यूनियनों का  मुम्बई में प्रथम राष्ट्रीय सम्मेलनआयोजित किया गया। आल इण्डिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) की स्थापना इसी सम्मेलन में की गयी। कालांतर में इस संगठन पर साम्यवादियों का कब्जा हो गया . इस कारण सन् कांग्रेस के लोगों ने 1947 में इण्डियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इण्टक) स्थापना की। इस कारण से इण्टक शुरू से कांग्रेस के नेताओं के प्रभाव में रही और आज भी मुक्त नहीं है। एटक में ही उसकी नीतियों एवं नेताओं से असहमत कुछ समाजवादी नेताओं ने कलकत्ता में हिन्द मजदूर सभा का गठन किया। वामपंथ में विभाजन के फलस्वरूप 1949 में फारवर्ड ब्लाक और रिवोल्यूशनरी पार्टी के द्वारा ‘यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (यूटीयूसी) की स्थापना की हुई। 
                    साम्यवादी दल में विभाजन के कारण सन् 1964 में  भारत में कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का निर्माण हुआ। इस विभाजन का प्रभाव श्रमिक संगठन एटक पर पड़ा और कुछ लोगों ने उससे अलग होकर सन् 1970 में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) से सम्बद्ध सेंटर आफ इण्डियन ट्रेड यूनियन (सीटू) के रूप में एक नये श्रमिक संघ का निर्माण किया।
                    श्रमिक जगत में श्रमिकों का शोषण रोकने तथा उनके अधिकारों की रक्षा करने एवं उनमें राष्ट्र भाव को जगाने के लिये के लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक श्री दत्तोपंत ठेगड़ी ने 23 जुलाई 1955 को भोपाल में एक गैर राजनीतिक श्रमिक संगठन भारतीय मजदूर संघ की स्थापना की, जो सबसे बाद में स्थापित होते हुए भी भारत का संख्याबल की दृष्टि से प्रथम क्रमांक का श्रमिक संघटन है. आज यही संगठन आइ0एल0ओ0 में भारत के श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करता है.
                   

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